
फूलों-से नाज़ुक होते हैं,
ये मन्नत के धागे।
इस रेशमी बेल में,
अहसास के जुगनू जागे।
नहीं है यह मात्र धागा,
है विश्वास की एक डोरी।
लोगों ने पिरोये जिसमें,
भावनाओं के मोती।
किसी ने सफलता तो किसी ने,
अपनों की मुस्कान को है बाँधा।
फूलों-सा नाज़ुक होता है,
ये मन्नत का धागा।