यादों के पन्ने

“यादों के पन्ने”

वक़्त के साथ जैसे अमलतास,
से हो गए यादों के पन्ने।
मगर महक अब भी वही है,
गुलाब,बेला की डालें घने।
छू लो गर यादों का चंचल दामन,
लगे अहसास के मोती बिखरने।
कभी मुस्काये मीठी खुशियाँ,
तो कभी दर्द ओस बन लगे चमकने।
अमलतास जैसे इन पन्नों पर,
शब्द हैं सुर्ख गुलाब से बने।
पल-पल हृदय में यादों की,
एक बगिया-सी लगे महकने।

– सृष्टि स्नेही


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मन्नत के धागे

फूलों-से नाज़ुक होते हैं,
ये मन्नत के धागे।

इस रेशमी बेल में,
अहसास के जुगनू जागे।

नहीं है यह मात्र धागा,
है विश्वास की एक डोरी।

लोगों ने पिरोये जिसमें,
भावनाओं के मोती।

किसी ने सफलता तो किसी ने,
अपनों की मुस्कान को है बाँधा।

फूलों-सा नाज़ुक होता है,
ये मन्नत का धागा।

ग़म में सुकून…

ये तो नहीं कि ग़म नहीं,
हाँ! सागर में डूबे नयन नहीं।

जज़्बात तो पल-पल बिखरते रहे,
हुआ खामोशियों का भँवर खतम नहीं।

कभी यहाँ भी लगता था मेला अपनों का,
मगर अब इस बात का दिल में भरम नहीं।

ज़िन्दगी से सौगात मिली तन्हाई के आशियाने की,
जहाँ रिश्तों के बिच्छुओं का सितम नहीं।

काँटे ही बिछे हैं इस आशियाने में,
मगर उनमें फूलों की खुशबू कम नहीं।

समेटना सीख लिया हमने दर्द के मोतियों को,
इसका मतलब ये तो नहीं कि ग़म नहीं।

ये तो नहीं कि ग़म नहीं,
हाँ! सागर में डूबे नयन नहीं।

जज़्बात तो पल-पल बिखरते रहे,
हुआ खामोशियों का भँवर खतम नहीं।

कभी यहाँ भी लगता था मेला अपनों का,
मगर अब इस बात का दिल में भरम नहीं।

ज़िन्दगी से सौगात मिली तन्हाई के आशियाने की,
जहाँ रिश्तों के बिच्छुओं का सितम नहीं।

काँटे ही बिछे हैं इस आशियाने में,
मगर उनमें फूलों की खुशबू कम नहीं।

समेटना सीख लिया हमने दर्द के मोतियों को,
इसका मतलब ये तो नहीं कि ग़म नहीं।


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चाय संग ज़िंदगी

आज चाय की मीठी चुस्कियों में,,
ज़िंदगी के कड़वे दर्द,,
भुलाने की कोशिश कर रहे हैं…।

आज चाय की मीठी चुस्कियों में,,
ज़िंदगी के कड़वे दर्द,,
भुलाने की कोशिश कर रहे हैं…।


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ज़िंदगी एक किताब

ज़िन्दगी एक खुली किताब है,
जिसमें पन्ने बेहिसाब हैं।
कुछ में तो खूबसूरत ख़्वाब हैं,
और कुछ में दर्द का हिसाब है।
किसी पन्ने में एक खूबसूरत मुलाक़ात है,
तो कहीं तन्हाई की एक एक रात है।
कोई पन्ना लिए सपनों की सौगात है,
तो कोई सिर्फ़ अश्कों की बारात है।
ज़िन्दगी एक खुली किताब है,
जिसके पन्ने उड़ते ख़्वाब हैं।
खट्टे मीठे कुछ तीखे,
हर तरह का यहाँ स्वाद है।
पर कहीं एक जगह पर,
ना इनका ठहराव है।

ज़िन्दगी एक खुली किताब है,
जिसमें पन्ने बेहिसाब हैं।
कुछ में तो खूबसूरत ख़्वाब हैं,
और कुछ में दर्द का हिसाब है।
किसी पन्ने में एक खूबसूरत मुलाक़ात है,
तो कहीं तन्हाई की एक एक रात है।
कोई पन्ना लिए सपनों की सौगात है,
तो कोई सिर्फ़ अश्कों की बारात है।
ज़िन्दगी एक खुली किताब है,
जिसके पन्ने उड़ते ख़्वाब हैं।
खट्टे मीठे कुछ तीखे,
हर तरह का यहाँ स्वाद है।
पर कहीं एक जगह पर,
ना इनका ठहराव है।