ये तो नहीं कि ग़म नहीं,
हाँ! सागर में डूबे नयन नहीं।

जज़्बात तो पल-पल बिखरते रहे,
हुआ खामोशियों का भँवर खतम नहीं।

कभी यहाँ भी लगता था मेला अपनों का,
मगर अब इस बात का दिल में भरम नहीं।

ज़िन्दगी से सौगात मिली तन्हाई के आशियाने की,
जहाँ रिश्तों के बिच्छुओं का सितम नहीं।

काँटे ही बिछे हैं इस आशियाने में,
मगर उनमें फूलों की खुशबू कम नहीं।

समेटना सीख लिया हमने दर्द के मोतियों को,
इसका मतलब ये तो नहीं कि ग़म नहीं।

ये तो नहीं कि ग़म नहीं,
हाँ! सागर में डूबे नयन नहीं।

जज़्बात तो पल-पल बिखरते रहे,
हुआ खामोशियों का भँवर खतम नहीं।

कभी यहाँ भी लगता था मेला अपनों का,
मगर अब इस बात का दिल में भरम नहीं।

ज़िन्दगी से सौगात मिली तन्हाई के आशियाने की,
जहाँ रिश्तों के बिच्छुओं का सितम नहीं।

काँटे ही बिछे हैं इस आशियाने में,
मगर उनमें फूलों की खुशबू कम नहीं।

समेटना सीख लिया हमने दर्द के मोतियों को,
इसका मतलब ये तो नहीं कि ग़म नहीं।


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